भेंगापन (Squint Eye), जिसे मेडिकल भाषा में Strabismus कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें दोनों आँखें एक ही दिशा में एक साथ फोकस नहीं कर पातीं। एक आँख सीधा देखती है जबकि दूसरी आँख अंदर, बाहर, ऊपर या नीचे की ओर मुड़ जाती है। बहुत से लोग मानते हैं कि भेंगापन का इलाज केवल सर्जरी से ही संभव है, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। कई मामलों में बिना सर्जरी के भी इलाज संभव होता है, खासकर अगर समय पर उपचार शुरू किया जाए।

 

 

भेंगापन होता क्यों है? 

भेंगापन केवल आँखों की मांसपेशियों की समस्या नहीं है, बल्कि कई बार यह आँख और दिमाग के तालमेल (Eye-Brain Coordination) की समस्या होती है।

भेंगापन होने के मुख्य कारण:

  • आँखों की मांसपेशियों का असंतुलन
  • नंबर का चश्मा (Refractive Error)
  • Lazy Eye (Amblyopia)
  • जन्म से आँखों का ठीक से विकसित न होना
  • नर्व या दिमाग से संबंधित समस्या
  • चोट या बुखार के बाद आँख मुड़ना
  • ज्यादा नंबर होने पर एक आँख का ज्यादा काम करना

बहुत से बच्चों में भेंगापन इसलिए होता है क्योंकि एक आँख से साफ दिखाई नहीं देता, तो दिमाग उस आँख की इमेज को ignore करने लगता है और आँख धीरे-धीरे मुड़ जाती है।

 

 

क्या भेंगापन में हमेशा सर्जरी जरूरी होती है?

नहीं। वास्तव में, ज्यादातर मामलों में भेंगापन का इलाज बिना सर्जरी के करना बेहतर माना जाता है।

भेंगापन (Squint) को अक्सर लोग केवल आँख की मांसपेशियों की समस्या समझते हैं, इसलिए सीधे सर्जरी के बारे में सोचते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि भेंगापन केवल आँख की मांसपेशियों की नहीं, बल्कि आँख और दिमाग के coordination की समस्या होती है। इसलिए केवल सर्जरी करने से हमेशा समस्या की जड़ (root cause) ठीक नहीं होती।

सर्जरी केवल आँख की muscle की position बदलती है,  लेकिन दिमाग और आँख का coordination नहीं सिखाती। इसलिए कई बार:

  • सर्जरी के बाद भी आँख फिर मुड़ जाती है
  • या आँख सीधी दिखती है पर vision proper नहीं होता
  • या depth perception develop नहीं होता 

बहुत सारे squint cases में Lazy Eye होता है, जिसमें एक आँख की vision कम होती है क्योंकि दिमाग उस आँख को use नहीं करता। यह बहुत महत्वपूर्ण बात है: अगर Lazy Eye है और आप सीधे सर्जरी कर देते हैं, तो आँख सीधी दिखेगी लेकिन vision improve नहीं होगा।

बहुत बच्चों में भेंगापन का कारण होता है:

  • Hyperopia (plus number)
  • Astigmatism
  • Anisometropia (दोनों आँखों का अलग नंबर)

जब बच्चा focus करने की कोशिश करता है, तो आँख अंदर मुड़ जाती है। ऐसे cases में सही नंबर का चश्मा लगाने से ही squint कम या खत्म हो सकता है। अगर ऐसे case में सीधे surgery कर दी जाए, तो यह सही treatment approach नहीं माना जाता।

 

Vision Therapy आँखों को साथ काम करना सिखाती है

Vision Therapy में हम काम करते हैं:

  • Eye tracking
  • Eye focusing
  • Eye teaming
  • Depth perception
  • Hand-eye coordination
  • Eye-brain coordination
  • Peripheral awareness

यह treatment function improve करता है, सिर्फ appearance नहीं। सर्जरी cosmetic alignment देती है, Vision therapy functional vision improve करती है।

 

 

 

बार-बार सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है

Squint surgery में muscles adjust की जाती हैं, लेकिन:

  • Muscle फिर shift हो सकती है
  • Brain adaptation नहीं हुआ तो eye फिर turn हो सकती है
  • Growth के साथ angle बदल सकता है

इसलिए कुछ patients में:

  • 2 surgeries
  • 3 surgeries
  • Even more surgeries

भी करनी पड़ती हैं। Non-surgical approach में हम सिर्फ muscle को adjust नहीं करते।

 

 

बहुत से मामलों में चश्मा, lazy eye treatment, vision therapy और eye exercises से भेंगापन में अच्छा सुधार देखा जाता है और कई बार सर्जरी की जरूरत भी नहीं पड़ती। सर्जरी कुछ cases में जरूरी हो सकती है, लेकिन सर्जरी हमेशा पहला कदम नहीं, बल्कि आखिरी विकल्प (last option) होना चाहिए, जब बाकी treatments से पर्याप्त सुधार न मिले।

 

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भेंगापन का इलाज जितना जल्दी शुरू किया जाए, उतना बेहतर long-term results मिलते हैं।

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